नई दिल्ली, फरवरी 1 -- ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को कर्मफल का देवता माना जाता है। शनि सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह है, जो एक राशि में लगभग ढाई साल और पूरे राशि चक्र को पूरा करने में करीब 30 साल लेता है। शनि का प्रभाव जीवन में कष्ट और अनुशासन दोनों लाता है। जब शनि की महादशा, साढ़ेसाती या ढैय्या चलती है, तो व्यक्ति को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन यह समय आत्म-मूल्यांकन, मेहनत और सुधार का भी होता है। शनि का प्रभाव समझना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इससे व्यक्ति अपनी कमजोरियों को पहचानकर बेहतर जीवन जी सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं इन तीनों अवधारणाओं के बारे में।शनि महादशा क्या होती है? शनि की महादशा विंशोत्तरी दशा प्रणाली में 19 साल तक चलती है। यह दशा तब शुरू होती है, जब कुंडली में शनि की महादशा का समय आता है। महादशा में शनि व्य...