नई दिल्ली, जुलाई 31 -- शनि की साढ़ेसाती वह अवधि होती है, जब शनिदेव किसी राशि में साढ़े सात साल के लिए विराजमान होते हैं। ज्यादातर लोग इसे कष्टकारी समय मानते हैं और डरते हैं कि इसमें सिर्फ समस्याएं ही आएंगी। लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, साढ़ेसाती हमेशा अशुभ नहीं होती है। कुछ खास लोगों के लिए यह समय मान-सम्मान और तरक्की लेकर आता है। शनिदेव कर्मों के फलदाता हैं। जो लोग सही कर्म करते हैं, उनके लिए यह अवधि सफलता का द्वार खोलती है।मकर और कुंभ राशि वालों के लिए शुभ राशिचक्र में मकर और कुंभ राशि के स्वामी स्वयं शनिदेव हैं। इन दोनों राशियों के जातकों पर साढ़ेसाती का प्रभाव अपेक्षाकृत कम नुकसानदायक होता है। बल्कि कई बार यह समय उनके लिए लाभकारी साबित होता है। काम में स्थिरता मिलती है और धीरे-धीरे तरक्की के रास्ते खुलते हैं। हालांकि, इन लोगों को ...