नई दिल्ली, मार्च 9 -- दशमहाविद्याओं में मां धूमावती का स्वरूप सबसे अलग और रहस्यमयी है। इन्हें अलक्ष्मी, धनहीन और विधवा कहा जाता है, क्योंकि इनका रूप भयंकर और विकट है। मलिन वस्त्र, उन्मुक्त रुक्ष केश, शिथिल पयोधर, बड़ी फैली नाक, कुटिल नेत्र और शूर्प हाथ में लिए ये देवी शत्रुओं के हृदय में भय भरने के लिए ही ऐसा रूप धारण करती हैं। बाहरी रूप भले ही डरावना हो, लेकिन इनका अंतःकरण करुणा से परिपूर्ण है। ये भक्तों की रक्षा करती हैं, दरिद्रता का नाश करती हैं और शत्रुओं को परास्त करती हैं। नैमिषारण्य काली पीठ में स्थित मां धूमावती का मंदिर इसीलिए प्रसिद्ध है। आइए जानते हैं इनके स्वरूप, महत्व और साधना के बारे में।मां धूमावती का भयंकर स्वरूप और प्रतीक मां धूमावती का रूप त्रिवर्णा, विरलदंता, मुक्तकेशी, शूर्पहस्ता और काकध्वजिनी के रूप में वर्णित है। इनक...
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