नई दिल्ली, जनवरी 20 -- प्रत्येक व्यक्ति का मन अनेक शक्तियों को संजोए हुए है। हम मन की शक्तियों से परिचित नहीं हैं। उसमें असीम शक्तियां हैं। यदि हम मन की शक्तियों से परिचित हो जाएं, उन्हें विकसित कर लें, तो क्या नहीं हो सकता? संसार में सर्वाधिक प्राथमिक आवश्यकता है- शक्ति की। शारीरिक शक्ति के लिए भी मन की शक्ति का होना जरूरी है। मन का बल टूटते ही शरीर का बल टूट जाता है। मन मजबूत होता है, तो शरीर भी साथ देता है। मन दुर्बल हुआ, तो शारीरिक शक्तियां भी क्षीण होने लग जाती हैं। शक्ति का संचय और सुरक्षा का उपाय है, तनाव से बचना। मानसिक तनाव मन की शक्ति को और भावनात्मक तनाव आत्मा की शक्ति को क्षीण करता है। शक्ति का सबसे बड़ा रहस्य है, शरीर और मन दोनों का एक साथ रहना। जिसने दूसरों को जीता और अपने आपको नहीं जीता, वह दुर्बल है। मन और इच्छाओं को जीतना...
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