डॉ प्रकाश चंद्र गंगराडे, जून 30 -- पूजा-पाठ, उत्सव, हवन, विजयोत्सव, आगमन, विवाह, राज्याभिषेक आदि शुभ कार्यों में शंख बजाना शुभ और अनिवार्य माना जाता है। मंदिरों में सुबह और शाम के समय आरती में शंख बजाने का विधान है। शंखनाद के बिना पूजा-अर्चना अधूरी मानी जाती है।कई वेदों में इसके बारे में बताया गया है। अथर्ववेद के चौथे कांड के दसवें सूक्त में स्पष्ट कहा गया है- 'शंख अंतरिक्ष, वायु, ज्योतिर्मंडल एवं सुवर्ण से संयुक्त है। इसकी ध्वनि शत्रुओं को निर्बल करने वाली होती है। यह हमारा रक्षक है। यह राक्षसों और पिशाचों को वशीभूत करने वाला, अज्ञान, रोग एवं दरिद्रता को दूर भगाने वाला तथा आयु बढ़ाने वाला है।' शास्त्रकार कहते हैं-यस्य शंखध्वनिं कुर्यात्पूजाकाले विशेषतः।विमुक्तः सर्वपापेन विष्णुना सह मोदते॥ (स्कंद पुराण) अर्थात पूजा के समय जो व्यक्ति शंख ...