फर्रुखाबाद कन्नौज, जुलाई 29 -- कायमगंज, संवाददाता गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विश्व बंधु परिषद की ओर से भगवान व्यास पूजन एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें प्रोफेसर रामबाबू मिश्र रत्नेश ने कहा कि व्यासदेव सही मायने में विश्व गुरु हैं। उन्होंने विश्व के विशालतम महाकाव्य महाभारत, श्रीमद् देवी भागवत और 18 पुराण जैसी कालजयी रचनाएं दीं। वेदों का संग्रह एवं संयोजन भी उन्हीं की देन है। गीता उनकी अक्षय कीर्ति का शाश्वत प्रकाश स्तंभ है। पूर्व प्रधानाचार्य अहिवरन सिंह गौर ने कहा कि शिक्षा के मशीनीकरण से गुरु-शिष्य परंपरा, संस्कार और चरित्र का ह्रास हुआ है। शिक्षक वीएस तिवारी ने कहा कि गुरु का वचन ही अध्यात्म का मूल मंत्र है। यह भी पढ़ें- गुरु की खोई प्रतिष्ठा लौटाना ही महर्षि वेदव्यास को सच्ची श्रद्धांजलि गुरु कृपा से असंभव कार्य भी सिद्ध हो जाते ह...