गोंडा, मई 4 -- रुपईडीह, संवाददाता। श्रीरामचरित मानस व्यवहार संहिता है और मनुष्य को भवसागर पार लगाने का मध्यम है। कथा में पहुंचना ही व्यक्ति की श्रद्धा व भक्ति का प्रतीक है। घर, परिवार, राष्ट्र व समाज में श्रेष्ठ व्यक्ति बनने के लिए रामचरितमानस में गोता लगाना पड़ेगा। इसके बाद ही व्यक्ति श्रेष्ठ बन सकता है। कथा श्रवण मात्र से ही व्यक्ति भवसागर पार कर सकता है। यह बातें प्रख्यात कथाव्यास राजन महाराज ने कौड़िया के सम्मय माता मंदिर पैडीबरा में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा में कही।

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