नई दिल्ली, जुलाई 31 -- सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि पत्नी पर व्यभिचार साबित हो जाता है तो वह किसी भी तरह के गुजारा-भत्ता की हकदार नहीं होगी। शीर्ष अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पति की ओर से दाखिल याचिका पर टिप्पणी की। जस्टिस संजय करोल और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह भी कहा कि पति व्यभिचार का आरोप लगाता है, तो पत्नी को अंतरिम गुजारा-भत्ता देने से पहले अदालत को सबसे पहले इस मुद्दे पर विचार करना चाहिए। अदालतों का यह मानना ​​गलत होगा कि ऐसे सवाल पर सिर्फ अंतिम फैसले के समय ही विचार किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि 'चूंकि सीआरपीसी की धारा 125 (4) में यह प्रावधान है कि अगर व्यभिचार साबित हो जाता है, तो पत्नी न तो अंतरिम और न ही अंतिम गुजारा-भत्ते की हकदार होगी。 यह भी पढ़ें- पत...