व्यक्ति मरता है, उसके सद्विचार कभी नहीं मरते : प्रो.शर्मा
वाराणसी, जून 26 -- वाराणसी। व्यक्ति का शरीर समाप्त भले हो जाता है, लेकिन उसके द्वारा समाज में छोड़े गए सद्विचार कभी नहीं मरते। हिंदी और संस्कृत साहित्य के उत्थान में विशिष्ट योगदान करने वाले डॉ.राजेंद्र प्रसाद पांडेय सिर्फ एक व्यक्ति नहीं थे, साहित्य समाज ने उन्हें विचार के रूप में स्वीकार किया है। ये बातें संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारीलाल शर्मा ने गुरुवार को नांदी सेवा न्यास की ओर से डॉ. राजेंद्र पांडेय की स्मृति में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि कहीं। रथयात्रा स्थित कन्हैया लाल स्मृति भवन में हुए समारोह में प्रो. शर्मा ने कहा कि डॉ. पांडेय अपने सृजन के रूप में हम सब के लिए साहित्य का अद्भुत खजाना छोड़ गए हैं। अध्यक्षता करते हुए डॉ. दयानिधि मिश्र ने कहा कि यह कार्यक्रम...
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