मेरठ, मई 21 -- आचार्य भाव भूषण महाराज ने कहा कि श्री शांतिनाथ भगवान की भक्ति संसारी जीवों, प्राणीयों को मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। जहां पर अहिंसा तत्व की सर्वोपरि प्रधानता हो वहीं जैन धर्म है। तीर्थंकर ऋषभ देव ने दया मूलक (अहिंसा मूलक) धर्म का निर्माण या प्रवर्तन किया। जो दया से विशुद्ध हो वहां धर्म है, जीवों की रक्षा ही धर्म है। व्यक्ति जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है और कोई भी व्यक्ति अपने अंदर विद्यमान प्रतिभा से पूरे विश्व में पहचान बना सकता है। इससे पहले जैन तीर्थ के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में विराजमान श्री शांतिनाथ भगवान के सम्मुख 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान का ध्वजारोहण के साथ शुभारंभ हुआ। विधान मुनि भाव भूषण महाराज ससंघ के सानिध्य में प्रारंभ हुआ।

शांतिनाथ विधान का शुभारंभ शांतिनाथ विधान ...