व्यक्ति को जीवन में जो मिला है, उसका श्रेष्ठ उपयोग पुरुषार्थ है:मुनिश्री
गिरडीह, अगस्त 14 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। जीवन में अच्छे संयोग अत्यंत दुर्लभता से प्राप्त होते हैं, लेकिन उससे भी अधिक दुर्लभ है उन संयोगों का सदुपयोग करना। व्यक्ति को जीवन में जो मिला है, उसका श्रेष्ठ उपयोग करते हुए पुरुषार्थ करना चाहिए, न कि अभावों को लेकर रोते रहना चाहिए। उक्त बातें गुणायतन में साधनारत राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में कही। मुनिश्री ने कहा कि संसार में दो प्रकार के लोग दिखाई देते हैं। एक वे, जो जीवनभर यह शिकायत करते रहते हैं कि उन्हें कुछ नहीं मिला और दूसरे वे, जिन्हें बहुत कुछ मिला, लेकिन उन्होंने उसका कोई सदुपयोग नहीं किया। दोनों ही अंततः पश्चाताप करते हैं। हालांकि, जिसे अवसर मिला और उसने पुरुषार्थ नहीं किया, उसका पछतावा लंबे समय तक साथ चलता है। मुनिश्री ने स्पष्ट कहा कि संसार में ऐसा क...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.