प्रयागराज, जुलाई 11 -- एनसीजेडसीसी की ओर से आयोजित साप्ताहिक विमर्श शृंखला के तहत शनिवार को केंद्र के बहुउद्देशीय सभागार में हास्य कवि व विधि शिक्षक डॉ. श्लेष गौतम ने विचार व्यक्त किए। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने साहित्य के विविध आयाम को रेखांकित करते हुए कहा कि साहित्य व्यक्ति व समाज के बीच संवाद का सेतु है। साहित्य केवल यथार्थ और कल्पना का समन्वय नहीं, बल्कि वैचारिकी, युगबोध, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक उत्तरदायित्व का सशक्त माध्यम भी है। साहित्य सृजन एक शाश्वत, सकारात्मक एवं निरंतर चलने वाली चिंतन और अभिव्यक्ति की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में साहित्य की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यही समाज को संवेदनशीलता, मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ता है। डॉ. श्लेष ग...