वाराणसी, जनवरी 15 -- वाराणसी। महमूरगंज स्थित कैलाश मठ में आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन गुरुवार को आशुतोषानंद गिरि ने वैष्णव अपराध के गंभीर परिणामों पर प्रकाश डाला। बताया कि जो व्यक्ति वैष्णवों का अपमान या अपराध करता है, उसका कभी भी उद्धार नहीं होता। वैष्णवों के प्रति श्रद्धा, सम्मान एवं सेवा ही ईश्वर कृपा का मार्ग प्रशस्त करती है। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि मां-बाप की सेवा से जीवन में सुख, समृद्धि, यश और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। उन्होंने कठोर शब्दों में बताया कि जो व्यक्ति माता-पिता पर प्रहार करता है या उनका अपमान करता है, ऐसे व्यक्ति का मुख दर्शन तक नहीं करना चाहिए। यह महापाप की श्रेणी में आता है। कथा में भगवान कार्तिकेय के जन्म प्रसंग का भी भावपूर्ण वर्णन किया। साथ ही गणेश जन्म, उनके शीश को काटे जाने के रहस...
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