नई दिल्ली, अक्टूबर 6 -- विश्व अर्थव्यवस्था के सामने एक ऐसा संकट आकार लेता दिख रहा है, जिसका सीधा संबंध प्रत्येक व्यक्ति की रसोई, भोजन की उपलब्धता और घरेलू बजट से है। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में संघर्ष, उर्वरकों की आपूर्ति में बाधाएं, ऊर्जा बाजार की अस्थिरता और संभावित शक्तिशाली अल नीनो ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसी पृष्ठभूमि में भारत के विदेश मंत्री ने पिछले दिनों न्यूयॉर्क में आसन्न गंभीर खाद्य संकट की आशंका व्यक्त की। उनका संदेश स्पष्ट था कि युद्धों का प्रभाव केवल सीमाओं और सैन्य मोर्चों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खाद्यान्न, उर्वरक, ऊर्जा और विकासशील देशों की आर्थिक स्थिरता तक पहुंचता है। भारत इससे बेअसर नहीं रह सकेगा। खाद्य महंगाई के आंकड़े पहले ही इसकी तस्दीक कर रहे हैं। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्य...