नई दिल्ली, अक्टूबर 28 -- दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने हाल ही में एक महिला की अंतरिम भरण-पोषण की मांग वाली याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि वैवाहिक विवादों में अक्सर पत्नियां अपने खर्चों व जरूरतों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती हैं, जबकि पति की प्रवृत्ति आय को कम दिखाने की होती है। न्यायिक मजिस्ट्रेट पूजा यादव की अदालत ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर याचिका पर यह आदेश दिया। अपने आदेश में अदालत ने कहा कि विवाह संबंधी विवादों में यह प्रवृत्ति देखी गई है कि व्यक्ति अपनी आय को कम बताता है और पत्नी अपने खर्चों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता महिला कानून स्नातक है और अक्तूबर 2024 तक दिल्ली महिला आयोग में कार्यरत रही है। उसने ऐसा कोई प्रमाण भी नहीं दिया, जिससे यह साबित हो कि वह अब काम करने में असमर्थ है या नौकरी पाने में...
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