वैमनस्य से पड़ती हैं अहंकार की गांठ
कानपुर, अगस्त 30 -- कानपुर। जिला और प्रतिनिधिसभा महानगर के वेद प्रचार सप्ताह के अंतर्गत तात्याटोपे नगर में हुई सभा में हरिद्वार से आए स्वामी वेद वृत्तानंद सरस्वती ने ऋग्वेद के मंत्र की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि समाज व परिवार में परस्पर विश्वास सद्भाव व स्नेह का अभाव है। इस कारण हमारे मन मस्तिष्क में वैमनस्य से अहंकार व अधिकारों की गांठे पड़ी हुई हैं। दूसरे की त्रुटियों को उपेक्षित कर भुला देने से ही गांठें समाप्त हो सकती हैं, जिससे उन्नत व खुशहाल परिवार व समाज बनेगा। सभा की प्रधान डॉ. आशा रानी राय ने कहा कि मानव कभी निष्क्रिय होकर नहीं रह सकता। उसे नदी के प्रवाह की तरह सतत कर्मशील, गतिशील व दीपक के समान ज्ञान के प्रकाश से स्वयं को आलोकित करते रहना चाहिए। दूसरों को सद विचारों व आस्तिकता की उपयोगिता बतानी चाहिए। संचालन मंत्री सत्येंद्र ब...
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