मेरठ, अप्रैल 6 -- आर्य समाज थापर नगर में आयोजित रविवारीय सत्संग में 'वैदिक शिक्षा पद्धति ही श्रेष्ठ क्यों' विषय पर विचार गोष्ठी हुई। मुख्य वक्ता राजेश सेठी ने कहा कि वैदिक शिक्षा पद्धति ही मनुष्य के सर्वांगीण विकास का आधार है। वर्तमान समय में शिक्षा का मुख्य उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को जीविका उपार्जन के लिए तैयार करना रह गया है, जबकि प्राचीन वैदिक शिक्षा पद्धति का उद्देश्य बालक के मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास को सुनिश्चित करना था। शिक्षा का मूल मंत्र 'मनुर्भव: जनया देवयम् जनाय' है, जिसका तात्पर्य है कि मनुष्य को श्रेष्ठ गुणों से युक्त बनाना ही शिक्षा का उद्देश्य होना चाहिए। कार्यक्रम में भजन संध्या का भी आयोजन हुआ। आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ संपन्न हुआ। मौके पर राकेश ओबराय, चांद ग्रोवर, सुनीता,...
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