सीतामढ़ी, मार्च 21 -- सीतामढ़ी। चैत्र नवरात्र के द्वितीया तिथि को माता दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विभिन्न मंदिरों,घरों व पूजा पंडालों में हुई। इन्हे ज्ञान,तपस्या व वैराग्य की देवी माना जाता है। जानकी जन्मभूमि पुनौरा धाम जानकी मंदिर में संध्या आरती के समय महिलाओं की भीड़ रही। ज्योतिषाचार्य अरुण झा ने बताया कि कठोर साधना व ब्रह्म में लीन होने के कारण इनको ब्रह्मचारिणी कहा गया है। मां ब्रह्मचारिणी पिछले जीवन में दृढ़ तपस्वी थी। भक्त उनके अविवाहित रूप की पूजा करते हैं। आज के दिन सफेद और लाल रंग को जोड़ने वाली पोषक पहनने की प्रथा है।

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