रांची, अप्रैल 9 -- रांची, वरीय संवाददाता। झारखंड को भविष्य के संभावित जल संकट से सुरक्षित रखने और वर्ष 2050 तक एक सुदृढ़, समेकित एवं टिकाऊ जल प्रबंधन प्रणाली विकसित करने के उद्देश्य से गुरुवार को केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड (सीयूजे) में नीति-निर्माताओं की एक परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. सारंग मेढेकर ने कहा कि जल संकट का समाधान केवल संसाधनों के विस्तार से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक योजना, तकनीकी नवाचार और विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय से ही संभव है। उन्होंने जल प्रबंधन में डेटा एनालिटिक्स, रिमोट सेंसिंग और आधुनिक तकनीकों के व्यापक उपयोग पर विशेष बल दिया।जल संसाधन विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ मोतीलाल पिंगुआ ने राज्य में जल अवसंरचना को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि झा...