वेश्यावृत्ति से बचाने के लिए बचपन में ही सगाई, इस गांव में बेटियों के सामने सिर्फ 2 रास्ते
वाडिया, सितम्बर 20 -- गुजरात के अहमदाबाद से 200 किलोमीटर दूर एक गांव में स्त्री-पुरुष के समानता की बात एकदम बेमानी साबित होती है। यहां की लड़कियों के सामने सिर्फ दो विकल्प होता है। या तो वे सात-आठ साल की उम्र में सगाई कर लें या फिर वेश्यावृत्ति के धंधे में जाने के लिए तैयार रहें। 'वेश्याओं के गांव' नाम से जाना जाने वाले वाडिया गांव में महिलाएं इतिहास से थोपी गई भूमिकाओं से आजाद होने के लिए संघर्ष कर रही हैं। पीढ़ियों से खानाबदोश जनजाति वाले इस गांव की महिलाओं को सेक्स ट्रेड (वेश्यावृत्ति) में धकेला जाता रहा है, जबकि पुरुष उनके एजेंट का काम करते हैं। यह सिलसिला आज भी जारी है। बनासकांठा जिले के इस 750 लोगों वाले गांव के पुरुष हर सुबह पालनपुर-थराद हाईवे पर जाते हैं। वे हाईवे पर काम की तलाश में नहीं, बल्कि ट्रक ड्राइवरों, राहगीरों और आस-पास क...
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