वेदव्यास जन्म और धुंधकारी के मोक्ष का प्रसंग सुनाया
मुजफ्फर नगर, जून 10 -- मुजफ्फरनगर श्री श्यामाश्याम मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा व्यास साध्वी कृष्ण प्रिया तुलसी ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर पापकर्म बढ़ता है, तब-तब धर्म की हानि होती है। उन्होंने महर्षि पाराशर और निषाद कन्या सत्यवती के पुत्र के रूप में वेदव्यास के जन्म, उनके तुरंत युवा होकर तपस्या के लिए प्रस्थान करने तथा वेदों का विभाजन कर अठारह पुराणों की रचना करने की कथा का विस्तार से वर्णन किया।साध्वी जी ने भगवान के 24 अवतारों सनकादि, वराह, नारद, नर-नारायण, कपिल, दत्तात्रेय, यज्ञ, ऋषभदेव, पृथु, मत्स्य, कूर्म, धन्वन्तरि, मोहिनी, नरसिंह, वामन, परशुराम, व्यास, श्रीराम, बलराम, श्रीकृष्ण, हयग्रीव, हंस, बुद्ध और कल्कि के बारे में भी बताया। यह भी पढ़ें- भक्ति ही मोक्ष का समर्थ साधन है : आचार्य धर्मेन्द्र महाराज इसके अतिरिक्त, ...
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