वेंटिलेटर से न संभले सांसों का संकट तो ईसीएमओ आखिरी सहारा
लखनऊ, अगस्त 22 -- सांस की गंभीर बीमारी में जब वेंटिलेटर से भी पर्याप्त ऑक्सीजन न मिले, तब ईसीएमओ (एक्स्ट्राकॉरपोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन) जीवन रक्षक तकनीक बनती है। लोहिया संस्थान के एनेस्थीसिया विभाग में आयोजित कार्यशाला में विभागाध्यक्ष डॉ. पीके दास ने बताया कि ईसीएमओ यानी एक्स्ट्राकॉरपोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन में मरीज के शरीर से खून एक मशीन में भेजा जाता है। मशीन खून में ऑक्सीजन मिलाती है। कार्बन डाईऑक्साइड बाहर निकालती है। इसके बाद साफ और ऑक्सीजन वाला खून वापस शरीर में पहुंचाया जाता है। इस तरह कुछ समय के लिए मशीन फेफड़ों का काम संभालती है। किन मरीजों को जरूरत पड़ती है?
किन मरीजों को जरूरत पड़ती है? संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने कहा कि ईसीएमओ हर मरीज के लिए नहीं होती। आमतौर पर उन मरीजों में इसका इस्तेमाल किया जाता है, जिनके फेफ...
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