नई दिल्ली, सितम्बर 30 -- बुजुर्गों के योगदान को सम्मान देने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए 1 अक्तूबर को 'अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस' मनाने की शुरुआत 1991 से हुई। आज भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई दूसरे देशों में भी वृद्धजन उपेक्षा के शिकार हो रहे हैं। वे आमतौर पर अपनों द्वारा सताए जा रहे हैं। कुछ बुद्धिजीवी कहते हैं कि सख्त कानून बनाने से बुजुर्गों के साथ होने वाले अन्याय और दुर्व्यवहार को रोका जा सकता है, लेकिन ऐसा मुश्किल है, क्योंकि बहुत से वृद्धजन इस बात से अनजान हैं कि अपने हितों के लिए कानून का सहारा कैसे लिया जाए? इतना ही नहीं, वे न तो भागदौड़ कर सकते हैं और न ऑनलाइन शिकायत में बहुत दक्ष होते हैं। सच यही है कि अगर वृद्धजन बीमार हैं, तो वे घर से बाहर नहीं निकल सकते। आज बच्चे घर के बुजुर्गों का शायद ही ख्याल रखते हैं और यदि र...