देहरादून, मार्च 9 -- जब सांसारिक विषयों से मन उचट जाए तो मनुष्य का ध्यान परमात्मा की ओर चला जाता है। यही वैराग्य मनुष्य के लिए निर्भयता का कारण बन जाता है। यह बात सोमवार को डोभालवाला में चल रही श्रीमद भागवत कथा में कथावाचक आचार्य शिवप्रसाद ममगांई ने कही। उन्होंने कहा कि संसार के सभी पदार्थ नाशवान हैं और हमसे एक-न-एक दिन छूटने वाले हैं, यदि व्यक्ति कुछ वैराग्य-भाव मन में धारण करते हुए प्रात:-सायं ईश्वर का चिन्तन करता रहे तो वह निर्भयता की ओर अग्रसर होता रहता है। अध्यात्मवाद पर चलने वाला व्यक्ति ही वैराग्य धारण कर सकता है। जबकि भौतिकवाद के मार्ग पर चलने वाले लोगों ने केवल प्रकृति और उसके परिणाम को ही स्वीकार किया। आंखें जिसे देखती हैं, कान जिसे सुनते हैं, जिह्वा जिसका रस लेती है, त्वचा जिसका स्पर्श करती है, भौतिकवादी के लिए यही सत्य है। वही...
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