कुशीनगर, मार्च 3 -- कुशीनगर। सावधान! युवाओं की सुनने की शक्ति पर शोर का पहरा बढ़ता जा रहा है। बहरापन अब जन्मजात नहीं, बल्कि गलत आदतों की वजह से बढ़ रहा है। आज विश्व श्रवण दिवस है, लेकिन डॉक्टरों की चेतावनी डराने वाली है। क्योंकि इसकी चपेट में ज्यादातर अब टीनएजर्स आ रहे हैं। यही नहीं, वृद्धजनों से अधिक यह बीमारी अधेड़ अवस्था से ही देखी जा रही है। कभी बढ़ती उम्र या जन्मजात कमी के कारण होने वाला बहरापन अब टीनएजर्स और युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हमारी डिजिटल लाइफस्टाइल और शोर वाली संस्कृति कानों के लिए दुश्मन बन गई है। क्यों कम उम्र में छिन रही है सुनने की क्षमता? डॉक्टरों की मानें तो इयरबड्स और हेडफोन का घंटों इस्तेमाल करने वाले युवाओं पर इसका दुष्प्रभाव अधिक देखा जा रहा है। कान के पर्दों के बिल्कुल करीब तेज...