अलीगढ़, अप्रैल 22 -- अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। तालों के शहर अलीगढ़ में तालीम के जरिए पूरी की पूरी पीढ़ी की तकदीर बदल रही है। विश्व पुस्तक दिवस के मौके पर, अलीगढ़ की गलियां और पुरानी लाइब्रेरी आज भी कागज़ों की खुशबू की याद दिलाती हैं, जहाँ किताबों में तहज़ीब की रूह बसती है। किताबों के प्रति अलीगढ़ का यह गहरा प्रेम 1864 में साइंटिफिक सोसाइटी की स्थापना के साथ शुरू हुआ था। इस सोसाइटी के प्रकाशन 'अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजट' ने यहाँ प्रिंट कल्चर और पत्रकारिता की एक नई नींव रखी। वहीं एएमयू मौलाना आज़ाद लाइब्रेरी जो कि एशिया के सबसे बड़े पुस्तकालयों में से एक है। यह भी पढ़ें- पुस्तकों से दूर कर रही रील संस्कृति इस लाइब्रेरी में मुगल बादशाहों के दौर की हस्तलिखित पांडुलिपियाँ और दस्तावेज़ सुरक्षित हैं। यहाँ महात्मा गांधी के पत्रों से लेकर पुराने कवियो...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.