विश्व नदी दिवस: अस्तित्व के संकट से जूझ रहीं झारखंड की जीवनरेखाएं
रांची, सितम्बर 27 -- रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। जल प्रकृति का अमूल्य उपहार है, इसका संरक्षण और सतत प्रबंधन पर्यावरण संतुलन के लिए अनिवार्य है। तेजी से बढ़ती आबादी और पानी की सीमित उपलब्धता के बीच वनों व नदियों के अटूट संबंध को रेखांकित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष सितंबर के चौथे रविवार को विश्व नदी दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2026 के लिए इस दिवस की आधिकारिक थीम 'जंगल नहीं तो नदियां नहीं, पानी नहीं तो जीवन नहीं' है। झारखंड की भौगोलिक संरचना और आर्थिक व्यवस्था नदियों पर काफी हद तक निर्भर है। राज्य में प्रवाहित होने वाली छोटी-बड़ी नदियां न केवल कृषि और उद्योग के लिए संजीवनी हैं, बल्कि एक बड़ी आबादी के जीवनयापन का आधार भी हैं। झारखंड की प्रमुख नदियों में दामोदर, स्वर्णरेखा, बराकर, उत्तरी कोयल, दक्षिणी कोयल, शंख, सोन, अजय, मयूराक्षी (मोर), ब्राह...
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