गोरखपुर, मार्च 22 -- गोरखपुर, मुख्य संवाददाता। बशारतपुर में वर्षों से बदहाल पड़ा मोती पोखरा 'आरईजीएएल' यानी 'रेडिकल एन्हांसमेंट यूसिंग गैस असिस्टेड लिक्विड डिस्पर्सन' तकनीक से हुई सफाई से सिर्फ तीन में स्वच्छ दिखने लगा है। 10 जनवरी को मेसर्स वेस्टेक इंफ्रा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने काम शुरू किया था, तीन माह में पोखरे की तली तक दिखने लगी है। गोरखपुर नगर निगम जल्द ही चार अन्य पोखरों में इसी तकनीक से सफाई कराने की योजना बना रहा है।आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने शनिवार को मौके की पड़ताल की। स्थानीय नागरिकों ने भी स्वीकार किया कि पोखरा काफी स्वच्छ हो गया है। पोखरे में नैनो बबल्स की शक्ति, उत्प्रेरक के रूप में अल्ट्रासाउंड और फ्री रेडिकल्स का उपयोग किया जा रहा। अल्ट्रासाउंड मशीन से 20 हजार से 30 हजार मेगा हर्त्ज की उत्पन्न ध्वनियां पोखरे के जल...