बांदा, मई 6 -- बांदा। शहर में स्पोर्ट्स स्टेडियम सहित अन्य खेल मैदानों ने ऐसे हुनरमंद खिलाड़ी दिए, जिन्होंने अपनी मेधा से जिले में ही नहीं, बल्कि विदेशों तक अपने मेधा की धाक जमाई। इसके बावजूद इन खेल मैदानों में सुविधाओं का अभाव है। स्पोर्ट्स स्टेडियम में सालों से क्रीड़ाधिकारी की तैनाती नहीं है। वहीं कई खेलों के कोच न होने से खिलाड़ी मेधा के बावजूद आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। स्पोर्ट्स स्टेडियम में 1995 में 40 लाख से बना तरणताल में 20 साल से ताला बंद है। यहां न तो पानी है और किसी प्रशिक्षक की तैनाती है। खुद की जान खतरे में डाल लड़के-लड़कियां तैराकी का हुनर केन नदी में सीख रहे हैं। नदी में ही अभ्यास कर भूरागढ़ की दो महिला खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीते। स्टेडियम के मैदान में हॉस्टल बना है और इसमें खिलाड़ी भी रहते हैं, लेकिन खाने से...
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