जौनपुर, मार्च 25 -- खेतासराय, हिन्दुस्तान संवाद। चैत्र नवरात्र में गोलाबाजार में हो रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन सोमवार की रात श्रद्धालुओं की भीड़ रही। कथावाचक सुधीरानंद महाराज ने सीताराम विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि पति-पत्नी का संबंध विश्वास की डोर से बंधा होता है। उन्होंने विवाह को एक तपस्या बताया। कहा कि गृहस्थ आश्रम का प्रारंभ विवाह से ही होता है। इसलिए यह सबसे श्रेष्ठ संस्कार है। एक संस्कार युक्त जीवन में हर प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं। पति और पत्नी को एक दूसरे का सहयोग करना चाहिए। पति-पत्नी का रिश्ता विश्वास, सम्मान, प्यार और आपसी समझ की एक अटूट डोर से बंधा होता है। जो दो आत्माओं को जोड़ता है। यह न केवल भावनाओं बल्कि सुख-दुख और जिम्मेदारियों को साझा करने का एक पवित्र बंधन है। एक दूसरे का भरोसा ही रिश्ते को जीवंत और मजबूत ...
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