कानपुर, जुलाई 9 -- कानपुर। विश्वविद्यालयों को स्थानीय कला को बढ़ावा देना चाहिए। इससे विरासत सुरक्षित रहेगी और कलाकारों को अत्यधिक संघर्ष नहीं करना होगा, यह बात सीएसजेएमयू से मानद उपाधि प्राप्त करने वाले कच्छ (गुजरात) के चर्म शिल्पकार अंचल पी बिजलानी ने कही। उन्होंने भावुक स्वर में राज्यपाल और विवि प्रशासन को नमन किया। कहा, यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि मेरी उस गौरवशाली विरासत का है, जिसे मेरे पूर्वजों ने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रखा। कहा, विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आकर, बनासकांठा से होते हुए कच्छ के सुमरासर गांव को कर्मभूमि बनाई। जीवित रहने के लिए अपनी विरासत को ही सहेजने का प्रयास किया। कला की कभी किसी ने खास कद्र नहीं की लेकिन अनारबेन पटेल ने इसे बढ़ावा दिया और आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए एक बड़ा बाजार उपलब्ध कर...