रांची, अप्रैल 2 -- बेड़ो, प्रतिनिधि। ऐतिहासिक परंपरागत तीन दिनी विशु शिकार को लेकर गुरुवार को 52 गांवों के पड़हा प्रेमियों के साथ ग्रामीणों का हुजूम डोलाटांड़ पहुंचा। रात्रि विश्राम के दौरान डोलाटांड़ में बैठक आयोजित की गई, जिसमें सामाजिक समस्याओं के समाधान पर चर्चा हुई। ग्रामीणों ने अपनी पारंपरिक विरासत और पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने का संकल्प लिया। इधर, विशु शिकार को लेकर ग्रामीणों का जत्था खखसीटोली, जमुनी, घाघरी, सरसा, देवगांव और लतरातू होते हुए ढोल, ढाक, मांदर, नगाड़ा और झंडा के साथ पारंपरिक अंदाज में डोलाटांड़ पहुंचा, जहां सभी ने रात्रि विश्राम किया। इस दौरान प्रत्येक पड़हा का प्रतीक चिन्ह झंडा, ढोल और नगाड़ा के साथ हाजिरी ली गई। कार्यक्रम में 12 पड़हा हरिहरपुर जामटोली के अगुवाई में पड़हा राजा विशाल उरांव, 21 पड़हा कोटवार इंद्रजीत उर...