संभल, दिसम्बर 27 -- विशुद्ध प्रेम से ही भगवान की प्राप्ति हो सकती है। रुक्मणी भगवान कृष्ण से विशुद्ध प्रेम करती थी। इसीलिए उन्हें श्री कृष्णा की प्राप्ति हुई। यह सद् विचार कथा व्यास रितुपर्ण कृष्ण शर्मा ने श्रीमद् भागवत कथा के दौरान व्यक्त किए। सीता रोड के बगिया वाली देवी मंदिर में चल रही भागवत कथा के छठे दिन विनोद शंखधार लक्ष्मी, शंखधार किरण शंखधार, राजेश शंखधार मुख्य आदि से नरवर के आचार्य गौरव शर्मा व जय शिव मिश्रा के द्वारा पूजन अर्चन कराया गया। इसके बाद श्रीमद् भागवत कथा प्रवक्ता आचार्य ऋतुपर्ण कृष्ण ने महारास के साथ मथुरा गमन और कंस वध उद्धव चरित्र के साथ रुक्मणी मंगल की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि रुक्मणी ठाकुर जी से विशुद्ध प्रेम करती थी और जीव विशुद्ध प्रेम ही ईश्वर की प्राप्ति कर सकता है। उन्होंने कहा की प्रेम ही ईश्वर का ...
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