अयोध्या, मार्च 17 -- अयोध्या संवाददाता। साइबर ठगी की ज्यादातर शिकायतें पुलिस की विवेचना में ही उलझी दिखती हैं। अमूमन पीड़ित की शिकायत दर्ज करने में आनाकानी होती है और अगर रिपोर्ट दर्ज भी हो गई तो वह विवेचना में उलझ जाती है। साइबर ठगी के शिकार पीड़ितों को रकम तभी वापस मिल पाती है जब उन्होंने तत्काल मामले में सक्रियता बरती और साइबर पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई तथा ठगी गई रकम संबंधित खाते में बची रह गई। अक्सर साइबर ठगों की ओर से रकम इधर-उधर खातों में भेज दी जाती है अथवा खरीददारी या फिर बिलों का भुगतान कर दिया जाता है। जिसके कारण पीड़ितों को आधी अधूरी रकम ही मिल पाती है। तमाम लोगों को तो फूटी कौड़ी भी हासिल नहीं होती। वर्ष 2024 में राठहवेली निवासी कनीज फात्मा के साथ लाटरी में आईफोन और एक लाख दीनार का झांसा देकर रजिस्ट्रेशन और प्रक्रिया आदि क...