गिरडीह, अगस्त 13 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। अक्सर यह सुनने को मिलता है अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है, खेलो-कूदो, यह सब बाद में करना। जीवन में ऐसी बातें कहने वाले अनेक लोग मिलेंगे, लेकिन इनसे विचलित होने की आवश्यकता नहीं है। व्यक्ति को अपने विवेक, श्रद्धा और आत्मविश्वास के साथ धर्म का पालन करना चाहिए। उक्त बातें गुणायतन में साधनारत राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने शंका समाधान कार्यक्रम में प्रवचन देते हुए कही।

धर्म और व्यवसाय का महत्व मुनिश्री ने कहा कि जीवन में व्यवसाय (प्रोफेशन) और धर्म दोनों का समान महत्व है। व्यवसाय पूरी निष्ठा, ईमानदारी और व्यावसायिकता के साथ करें, जबकि धर्म श्रद्धा, भाव और समर्पण से करें। ऐसा व्यवसाय चुनना चाहिए, जो धर्म और नैतिक मूल्यों के विरुद्ध न हो। वहीं, धर्म का पालन भी इस प्रकार किया जाए कि अपने कर्तव्यो...