नई दिल्ली, जनवरी 26 -- क्षमा शर्मा,वरिष्ठ पत्रकार पिछले दिनों तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया। हैदराबाद में एक व्यक्ति ने अदालत में अर्जी लगाई कि उसकी पत्नी नौकरीपेशा है, मगर न तो खाना बनाती है, न ही घर के कामों में उसकी मां, यानी अपनी सास की मदद करती है। उसका यह व्यवहार क्रूरता की श्रेणी में आता है, इसलिए इसे तलाक का आधार माना जाए। निचली अदालत ने उसकी अर्जी खारिज कर दी। वह व्यक्ति हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत ने सारी दलीलें सुनने के बाद कहा कि आप एक बजे से रात 10 बजे तक काम करते हैं, जबकि आपकी पत्नी सवेरे नौ बजे से शाम छह बजे तक नौकरी करती है। इसलिए अगर वह सवेरे खाना नहीं बना पाती, तो इसे क्रूरता नहीं माना जा सकता। पति ने यह भी दलील दी कि पत्नी अक्सर अपने माता-पिता के घर रहने चली जाती है। उसके साथ नहीं रहती। इस पर भी अदालत ने याच...
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