विवाह सनातन संस्कृति में आदर्श प्रेम समर्पण और तपस्या का है प्रतीक : अनुराधा सहचरी
भागलपुर, मई 8 -- कहलगांव , निज प्रतिनिधि दक्ष प्रजापति का मान भंग शंकर जी ने और शंकर जी का अपमान राजा दक्ष ने किया था। इसको लेकर ही माता सती ने अपने शरीर में अग्नि प्रज्ज्वलन कर भस्म कर लिया था। यह बातें सनोखर शिव मंदिर परिसर में आयोजित श्री महारुद्र यज्ञ परिसर में चल रहे श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथा वाचन करते हुए कथा वाचिका अनुराधा सहचरी ने कही। सती अगले जन्म में हिमाचल की पुत्री रूप में जन्म ली थी। हजारों वर्ष तक तपस्या के बाद पुनः पति के रूप में शंकर जी को प्राप्त किया था। इसे ही सच्ची श्रद्धा कहते हैं। यह भी पढ़ें- सती के त्याग और शिव के प्रेम की कथा सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु भगवान शिव का वैराग्य, माता पार्वती की अटूट श्रद्धा तथा देवताओं की प्रार्थना के बाद संपन्न हुआ यह दिव्य विवाह सनातन संस्कृति में आदर्श प्रेम, समर्पण और तपस्या क...
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