विवाह संस्था पर बना रहे विश्वास
नई दिल्ली, जून 1 -- विभूति नारायण राय,पूर्व आईपीएस अधिकारी मानव इतिहास की सबसे दीर्घजीवी और सभी धर्मों में पवित्रतम मानी जाने वाली संस्था 'विवाह' काफी हद तक जुआ बन गई है। हमारे देश में अधिकांश विवाह माता-पिता या परिवारीजन तय करते हैं और इनमें होने वाले पति-पत्नी की भूमिका न्यूनतम होती है, इसलिए उनके सफल या असफल होने की जिम्मेदारी से वे कुछ हद तक बच सकते हैं, पर अब यह वाक्य उन संबंधों के बारे में भी प्रासंगिक हो गया है, जो किसी लड़की व लड़के के मध्य उपजे प्रेम और लंबी या छोटी कोर्टशिप का परिणाम होते हैं। भोपाल में शो-बिज से जुड़ी ट्विशा शर्मा की हत्या/आत्महत्या की हालिया वारदात के चलते भारतीय विवाह संस्था से जुड़ी यौनिकता, एक विषाक्त रिश्ते को भी प्राणपण से बचाने की मध्यवर्गीय कामना, दांपत्य में परिवारीजनों की दखलंदाजी या वंशबेलि की वृद्धि...
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