नई दिल्ली, जून 28 -- ऋतु सारस्वत, समाजशास्त्री पहले सोनम और अब सिया- मीडिया में छाई ये खबरें सभी को स्तब्ध कर रही हैं। ऐसा लगातार क्यों हो रहा है? यह प्रश्न बार-बार मन में कौंध रहा है। यदि वह किसी और के प्रेम में थी, तो फिर उसने इस विवाह के लिए सहमति ही क्यों दी? वह मंगनी से इनकार भी तो कर सकती थी? आखिर क्यों किसी माता-पिता से उनका बेटा इस प्रकार छीन लिया गया? ये वे अनुत्तरित प्रश्न हैं, जिनका उत्तर खोज पाना सरल नहीं दिखता। हर कोई उस सोच और मन:स्थिति को समझना चाहता है, जिसने सोनम, सिया या मुस्कान को यह विश्वास दिलाया कि जीवन की जटिल समस्याओं का समाधान संवाद, असहमति या अलगाव में नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति को अपने रास्ते से हटा देने में निहित है। स्त्री हिंसा और उससे जुड़ी सामाजिक हकीकत पर हम प्रायः विमर्श करने से बचते रहे हैं। जब कभी किसी मह...