विवाह गुड्डे गुड़ियों का खेल नहीं
लखनऊ, जून 1 -- लखनऊ, कार्यालय संवाददाता विवाह गुड्डे-गुड़िया का खेल नहीं, एक ऐसा संस्कार है जहां वंश को आगे बढ़ाने सहित कई जिम्मेदारियां निभाते हुए आगे बढ़ना होता है। हंसी ठहाकों के बीच ये संदेश सम्भव सेवा समिति के कलाकारों ने जयवर्धन के लिखे हास्य नाटक हाय हैण्डसम ने दिया। नाटक का मंचन सुअंश सक्सेना अंकुर की परिकल्पना और निर्देशन में बलराज साहनी प्रेक्षागृह कैसरबाग में हुआ। मंच पर शशांक पांडे, सुअंश सक्सेना, अनामिका चौहान, शीलू मलिक व अन्य ने अभिनय किया।जन्मे हैं कृष्ण कन्हैया.....चित्रण कला मंच समिति और जय जगत एजुकेशन एण्ड वेलफेयर सोसायटी की ओर से नृत्यांगना अंशिका के निर्देशन में चली लोकनृत्य कार्यशाला के लगभग 30 प्रतिभागियों ने बलराज साहनी मंच पर महारास का प्रदर्शन किया। मंच पर कान्हा रे थोड़ा सा प्यार दे, राधा गोरी गोरी, मेरे घर राम ...
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