नैनीताल, अप्रैल 7 -- उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यूपी की अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिला केवल विवाह के आधार पर उत्तराखंड में आरक्षण का लाभ नहीं ले सकती। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि यदि पद रिक्त रहते हैं, तो संबंधित अभ्यर्थी को सामान्य श्रेणी में विचार का अवसर दिया जा सकता है। यह निर्णय न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने दो याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया। मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता का संबंध कहार समुदाय से है, जिसे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों में ओबीसी श्रेणी में शामिल किया गया है। उसका जन्म और पालन-पोषण उत्तर प्रदेश में हुआ था। विवाह के बाद उसने उत्तराखंड से ओबीसी प्रमाणपत्र प्राप्त किया और वर्ष 2023 में सहायक शिक्षक (प्राथमिक) पद के लिए चयन प्रक्रिया में ओबीसी आरक्षण का लाभ लेते हुए आवेदन क...