मोतिहारी, मार्च 31 -- सिकरहना, निज संवाददाता। दूसरों को यश देने वाली यशोदा जी हैं। घर में नौकर नौकरानी है। परंतु कृष्ण के लिए अपने हाथों से दधी मंथन कर मखन बनाती है, जो अभियान रहित होते हैं। वहीं कृष्णा प्रिय होते हैं। कृष्ण को जिसके शरीर में सात छिद्र कर दिए गए हैं ऐसे बांसुरी से प्रेम है। जनहित में समर्पित संत भी भगवान को प्रिय होते हैं। उक्त बातें कथा के अंतिम दिन मंगलवार को बड़हरवा लखनसेन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ में चंद्रेश शास्त्री ने कही। उन्होंने कहा कि कुबेर के पुत्र मणीग्रीव एवं नलकुबेर को अपने पिता के संपत्ति का अभिमान है। इसलिए वह नारद जैसे संत को समझ नहीं पाते। बिलासी व्यक्ति संत के प्रभाव को समझ नहीं सकता है। श्रीमद्भागवत कथा मंच से गांधी स्मारक एवं महात्मा गांधी के द्वारा संस्थापित आदर्श विद्यालय की हमेशा सफाई से...