नई दिल्ली, फरवरी 2 -- ज्योतिरादित्य एम सिंधिया, केंद्रीय मंत्री त्रिपुरा को समझने के लिए केवल उसके भौगोलिक स्वरूप या विकास के आंकड़ों को देखना पर्याप्त नहीं है। धान के खेतों की फैली हरियाली, नहरों पर बिखरी धूप और गांव की छतों पर सुनाई देने वाली रवींद्र संगीत की मीठी स्वर-लहरियां मिलकर यहां की दिनचर्या तय करती हैं। कभी-कभी शाम की नम, ठंडी हवाओं में सचिन देव बर्मन के सुरों की झिलमिलाहट सुनाई देती है, जो इस भूमि की सांस्कृतिक गहराई को शब्दों से परे पहुंचा देती है। मैंने अपनी हालिया यात्रा में जब ये दृश्य देखे, तो महसूस हुआ कि त्रिपुरा कैसे परंपरा और आधुनिकता का सम्मिलित अभियान बन चुका है। यही अभियान त्रिपुरा की जमीनी हकीकत का एक प्रतिबिंब है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर-पूर्व को 'अष्टलक्ष्मी' के रूप में देखने का जो दृष्टिकोण दिया, उसी...
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