रिषिकेष, अप्रैल 18 -- परमार्थ निकेतन में शनिवार को पांच दिवसीय योगा टीचर ट्रेनिंग कोर्स का समापन हुआ। इस दौरान योग जिज्ञासुओं ने योग की विभिन्न साधनाओं, विधाओं को आत्मसात किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि योग भारत की प्राचीनतम ज्ञान परंपरा है। यह केवल शरीर को मोड़ने की क्रिया नहीं, बल्कि जीवन को जोड़ने की कला है। हजारों वर्षों पूर्व भारत के ऋषियों ने ध्यान, प्राणायाम, संयम, अनुशासन और आंतरिक शांति के माध्यम से जो दिव्य विज्ञान खोजा, वही आज संपूर्ण विश्व के लिए आशा का प्रकाश बन चुका है। कहा कि जब विश्व तनाव, अवसाद, असंतुलन, हिंसा और अशांति जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब भारत की यह अमूल्य देन योग मानवता को नया मार्ग दिखा रही है। योग सिखाता है कि बाहर की जीत से पहले भीतर की शांति आवश्यक है; संसार को बदलने से पहले स्वयं को संतुलित करना ...
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