बरेली, अगस्त 14 -- बरेली। विभाजन की त्रासदी ने जो जख्म दिए, सात दशक से अधिक का वक्त भी उन्हें पूरी तरह नहीं भर सका। पाकिस्तान से उजड़कर बरेली आए परिवारों ने यहां मेहनत और हौसले से अपनी नई दुनिया बसाई, कामयाबी हासिल की, लेकिन उस भयावह दौर की यादें आज भी उनके जेहन में ताजा हैं। शहर में ऐसे कई परिवार हैं, जिन्होंने बंटवारे के दौरान अपना घर-बार, जमीन और अपनों को पीछे छोड़कर बरेली में नई जिंदगी शुरू की। यह भी पढ़ें- विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आज होंगे विविध कार्यक्रम खटवानी परिवार की कहानी बरेली में बसे खटवानी परिवार की कहानी भी बंटवारे के उस दर्द की गवाही देती है। परिवार आज भी पाकिस्तान के सिंध प्रांत में छूटी पुश्तैनी जमीन के दस्तावेजों को चार पीढ़ियों से धरोहर की तरह सहेज रहा है। बरेली के राजेंद्र नगर निवासी दवा कारोबारी मनोज खटवानी बता...