देहरादून, मई 29 -- विनम्रता और विवेक में ही सभी गुण समाए हुए हैं। व्यक्ति को हर पल विवेक से रहना चाहिये। वह जो भी कार्य करता है उसे पूर्ण विवेक के साथ ही करना चाहिये। बिना विवेक से किया हुआ कार्य सुफल नहीं देता। यह बात शुक्रवार को सहत्रधारा रोड स्थित शिव मंदिर में चल रही भागवत कथा के पांचवे दिन आचार्य शिव प्रसाद ममगांई ने कही। भगवान कृष्ण की बाललालाओं का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि इस जन्म में हम सभी को मनुष्य शरीर मिला है उसका सदुपयोग करके धर्म साधना में लगाना चाहिये। पल-पल हमारी उम्र घटती जा रही है। बड़ा होने के लिए हमेशा मर्यादा में रहना पड़ता है, क्योंकि हर बड़ी कंपनी के नाम में भी आखिरी में लिमिटेड लिखा होता है। यह भी पढ़ें- विनम्रता से ही आते हैं सारे गुण:आचार्य ममगांई दिमाग को खूब पढ़ाना लेकिन, दिल को हमेशा अनपढ़ ही रखना ताकि ये भा...