नई दिल्ली, अक्टूबर 6 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ‌अभिव्यक्ति की आजादी और विधायी विशेषाधिकारों से जुड़े मामले पर 7 जज की संविधान पीठ का संदर्भ बंद कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि अब इस पर विचार की जरूरत नहीं है क्योंकि तमिलनाडु विधानसभा के 2003 के उस प्रस्ताव को, जिसकी वजह से यह मामला शुरू हुआ था, 2004 में ही वापस ले लिया गया था। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची, न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली, न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति वी. मोहना की संविधान पीठ बनाई गई थी। पीठ ने मामले को प्रभावहीन मानते हुए कहा कि संदर्भ का आदेश देते समय कोर्ट का ध्यान इस बात पर नहीं गया था कि विवादित प्रस्ताव वापस ले लिया गया है। यह भी पढ़ें- अभिव्यक्ति की आजादी और ...