जमशेदपुर, मार्च 28 -- मानवाधिकार कार्यकर्ता जवाहरलाल शर्मा ने झारखंड विद्युत नियामक आयोग पर आरोप लगाया है कि वह सिर्फ जनसुनवाई का ढोंग करता है। वास्तव में वह पहले से तय कर चुका होता है कि दर बढ़ानी है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि जनसुनवाई का औचित्य ही क्या है, जब सब कुछ एकतरफा ही करना है। उन्होंने कहा कि वे बिजली का टैरिफ बढ़ाने अथवा नहीं बढ़ाने के मुद्दे पर जनसुनवाई सभा में सक्रिय भागीदार रहे हैं। उन्होंने और कई अन्य लोगों ने टैरिफ बढ़ोतरी के खिलाफ जोरदार पक्ष व सबूत रखते हुए विरोध किया था। दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग हैं, जो संभवत कंपनी प्रायोजित होते हैं। ऐसे-ऐसे तर्क कंपनी के पक्ष में देते हैं और गुणगान करते हैं कि आश्चर्य के साथ हंसी भी आती है। पर यह उनका प्रजातांत्रिक अधिकार है, वे ऐसा कर सकते हैं। लेकिन जो लोग तथ्यों और दस्तावेज के साथ बिज...