देहरादून, जनवरी 23 -- मां सरस्वती जो विद्या बुद्धि का प्रतीक है, वाणी, विद्या, संगीत और शास्त्रों की अधिष्ठात्री मां सरस्वती के प्रकाट्य दिवस ज्ञान चेतना और सृष्टि के सौंदर्य का पावन प्रतीक है। किशनपुर में अर्द्धनारीश्वर मंदिर में चल रही देवी भागवत में यह बात कथावाचक आचार्य शिवप्रसाद ममगांई ने कही। विद्या-आराधना का महापर्व ऋतुराज बसंत के मंगल आगमन से मन में आशा का संचार उत्पन्न होता है। मानव जीवन में ज्ञान, संस्कार और विवेक का उजास होता है। महाकाली, महालक्ष्मी और महा सरस्वती तीनों दिव्य स्वरूपों का अक्षय आशीर्वाद सदा पृथ्वी पर बना रहे। मौके पर पूर्व पार्षद उर्मिला थापा, भूपेन्द्र सिंह नेगी, कुसुम नेगी, नीतू रावत, माला बंगवाल, अशोक थापा, गौरव थापा, अनुभव नेगी, शिवेन्द्र भण्डारी, राघव गोयल, निर्मला गुसांई, ममता गुसांई, बीना नेगी, पूजा थापा,...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.