वाराणसी, दिसम्बर 14 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। मैथिल समाज उत्तर प्रदेश की ओर से आयोजित विद्यापति महोत्सव की दूसरी और समापन संध्या उनके यादगार गीतों से सजी। काशी और बिहार के कलाकारों ने बारी-बारी से विद्यापति के एक से बढ़ कर एक गीतों का गायन किया विश्वेश्वरगंज स्थित नागरी प्रचारिणी सभा में आयोजित महोत्सव में दूसरे दिन के सांस्कृतिक सत्र की शुरुआत काशी के डॉ. विजय कपूर के गायन से हुई। उन्होंने सबसे पहले विद्यापति की ख्यात रचना 'जय जय भैरवी असुर भयावनी' सुनाई। इसके बाद 'इहेन सुन्दर मिथिला धाम...', 'बड़ा सुख सागर पाओल...'और 'चारो दुलहा में बड़का कमाल सखिया...' से अपने गायन को विस्तार दिया। झारखंड से आमंत्रित गायिका ज्योति मिश्रा ने इस क्रम को आगे बढ़ाया। उन्होंने 'उगना हमर कत गेल...', 'देसिल बअना सब जन मिट्ठा...' और 'के पतिया लै जायत रे...'...
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